गुरु जीवन आधार है


सकल जगत
में गुण अवगुण का ज्ञान कराया गुरुवर ने
पाप पुण्य ओर नीति नियम रस पान कराया गुरुवर ने
प्रथम ऋणी है उस माता के जिसने जन्म दिया हमको
जीवन सुफल बनाये किस विध भान कराया गुरुवर ने।

सर्वप्रथम आप समस्त पाठक जन को शिक्षक दिवस की अंतःकरण की गहराइयों से शुभकामनाए...

आज 5 सितंबर भारत का शिक्षक दिवस प्रथम उपराष्ट्रपति ओर दूसरे राष्ट्रपति और शिक्षक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन।

गुरुपूर्णिमा के उपरांत गुरुस्वरूप शिक्षकों को स्मरण करने का ओर कृतज्ञता अर्पण करने का दिन....

शिक्षक यानी जो शिक्षा दे और शिक्षा मने जो जीवन को सुविचारों से सुहासित करे पल्लवित करे।

शिक्षक मने प्रज्ञा को जागृत करने की ओर इंगित करने वाला माध्यम...

शिक्षक मने मैं कौन हूँ और मेरी क्या भूमिका होगी के प्रश्न के समाधान की ओर पथ प्रदर्शित करने वाला व्यक्ति/तत्व/माध्यम/जीव/....

चौंकिए मत व्यक्ति के अलावा श्लेष के आगे लिखे सब सम्बोधन भी शिक्षक और गुरु ही है इसके लिए आपको पढ़ना होगा श्रीमद्भागवत महापुराण में आया हुआ भगवान दत्तात्रेय जी का 24 गुरुओं की कथा वाला पावन सन्देश....

भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए थे उनका कहना था के जीवन में जिस किसी से भी जितना सीखने को मिले हमें सीखना चाहिए और उन 24 गुरुओं में थे कबूतर,पृथ्वी,सूर्य,पिंगला,वायु,मृग,समुद्र,पतंगा, हाथी,आकाश,जल,मधुमक्खी,मछली, बालक, कुरर पक्षी,अग्नि,चन्द्रमा,कुमारीकन्या, सर्प, तीर(बाण)बनाने वाला,मकड़ी,भृंगी,अजगर ओर भ्रमर...

अतः जीवन मे शिक्षक दिवस मनाने की सार्थकता तब है जब शिक्षक की दी हुई सीख जीवन पर्यंत याद रहे। शिक्षक के आदर्श प्रतिमान याद रहे.. मानव को मानवता याद रहे।

अपने जीवन काल के दुनियावी शिक्षा के तमाम संस्थानों के शिक्षाविदों को एक श्वास में याद कर happy teachers'day कह इतिश्री कर लेने वाली जमात के ताबेदारों तनिक रूको तो।जरा विचार करना के क्या शिक्षक दिवस सिर्फ इस एक लाइन के bulk forwarded सन्देश जितनी ही महता रखता है क्या?

सुनील खांडल स्वराज

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

इंसानी सभ्यताओं के वास्तविक शिलालेख ओर संग्रहालय बुजुर्ग हैं

भाग फाटी खोल टाटी....