भाग फाटी खोल टाटी....
फोटो:- साभार भाग फाटी खोल टाटी राम दे सी दाल बाटी प्रातः काल जल्दी उठने को प्रेरित करते और दैनिक उद्योग हेतु उद्यत करते इस परम्परागत कथन को शत प्रतिशत शिरोधार्य मान कर रेतीले प्रदेश की दैनिक दिनचर्या सुर्योदय से पहले लगभग प्रातः 4:30-5 बजे से शुरू हो जाती है।लगभग 80-90 के दशक ओर कुछ कुछ बचे संयुक्त परिवारों में आज भी यही दिनचर्या का मानक है।बिस्तर त्याग ओर निवृत होने के पश्चात मरुभूमि का प्रथम कार्य होता था जलाशय से जल लेके आना ओर जल के स्रोत थे कुआ,बावड़ी,नाड़ी,तलाई,जोहड़ या सार्वजनिक वर्षा जल संचयन वाला कुण्ड।इन जलाशयों से ऊँट या बैलों की सहायता से चड़स(चमड़े या जूट या पाल का बड़ा थैलानुमा वस्तु जिसमें पानी भरता है) निकाला जाता था। घर के समस्त महिला और पुरुष सबसे पहले इसी काम मे लगते थे के पहले पहल प्रतिदिन काम आने योग्य पेयजल की व्यवस्था कर ली जाए।पेयजल लेने हेतु गाँव के समस्त घरों का ताँता लग जाता था कुओं पर ओर अनायास ही किसी मेले या उत्सवी जमावड़े का अहसास होने लगता था। इस जमावड़े से उठते थे भाँति भाँति के स्वर कभी महिलाओं की आपसी बातचीत,कभी पानी के कोठे में गिरने का स्वर ओर चड़...